लाला रामस्वरूप आर.सी. एंड संस कालान्तर दुनिया के सबसे पुराने और सबसे भरोसेमंद हिंदी कालान्तर एवं पंचांग प्रकाशकों में से एक है। इसका पहला संस्करण वर्ष 1937 में प्रकाशित हुआ था और तब से अब तक लाखों भारतीय इस पर सटीक और विश्वसनीय जानकारी के लिए भरोसा करते आ रहे हैं।
पीढ़ियों से भारत और विदेशों में लोग इस पंचांग का उपयोग विवाह, गृह प्रवेश, धार्मिक अनुष्ठान, त्योहारों और मुहूर्त चयन जैसे शुभ कार्यों के लिए करते आ रहे हैं। 80 से अधिक वर्षों में बनाया गया यह विश्वास कालान्तर को हर घर का जाना-पहचाना नाम बना चुका है।
हमारा कालान्तर नक्षत्र, त्योहार, व्रत, मुहूर्त, चंद्रमा की गति, ग्रहों की स्थिति और वैदिक ज्योतिष पर आधारित आवश्यक ज्योतिषीय जानकारी की सटीक दैनिक विवरण प्रदान करता है। इससे उपयोगकर्ता पहले से ही अपने लिए शुभ दिन, सही समय और अनुकूल काल का निर्धारण कर सकते हैं।
आज आधुनिक डिजिटल सुविधा के साथ, आप वही मुद्रित कालान्तर ऑनलाइन देख सकते हैं, वार्षिक संस्करणों को एक्सप्लोर कर सकते हैं और केवल एक क्लिक में प्रिंट प्रतियाँ सीधे ऑर्डर कर सकते हैं।
सूर्य की अपने परिभ्रमण पथ पर प्रति २४ घंटे (अहोरात्र) की औसत गति एक अंश है। इस प्रकार ३६० अंशों का परिभ्रमण एक वर्ष में पूरा होता है। इन ३६० अंशों को बारह राशियों (बारह महीनों) में विभक्त किया गया है। इस प्रकार एक राशि (एक मास) ३० अंशों की बनती है। सूर्य जिस दिन जिस समय ३० अंशों का परिभ्रमण पूर्ण कर एक राशि से दूसरी राशि में संचरण करता है, वह सूर्य संक्रांति कहलाती है। अंग्रेज़ी तिथियों के अनुसार सूर्य संक्रांति हमेशा १४ तारीख से १५ तारीख के मध्य होती है। जब दिन बड़े होते हैं तब संक्रांति १६ या १७ तारीख़ को होती है और जब दिन छोटे होते हैं तब संक्रांति १४ या १५ तारीख़ को होती है। तिथियों के अनुसार अमावस्या से अमावस्या के मध्य में संक्रांति आती है। संक्रांति और ऋतु–परिवर्तन का घनिष्ठ सम्बन्ध है।
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